सनातन वैदिक कर्मकांड पीठ • आचार्य निपुण शर्मा

वैदिक कर्मकांड एवं पितृ शांति

"नारायण बलि, त्रिपिंडी श्राद्ध, दशकर्म विधि करवाने के लिए और सीखने के लिए संपर्क करें।"

गरुड़ पुराण, धर्मसिंधु एवं निर्णयसिंधु के शास्त्रसम्मत नियमों के अनुसार तीर्थ क्षेत्रों (हरिद्वार, गया जी, काशी) अथवा आपके गृह स्थल पर प्रामाणिक कर्मकांड संपन्न कराए जाते हैं।

प्रमुख वैदिक कर्मकांड सेवाएं

प्रत्येक संस्कार व विधि में विशुद्ध वैदिक शुद्धता एवं शास्त्र मर्यादा का पूर्ण पालन किया जाता है।

नारायण बलि एवं नाग बलि

अकाल मृत्यु, अतृप्त पितृ दोष एवं वंश रुकावट की शांति

3 दिवस (हरिद्वार / तीर्थ क्षेत्र विधान)

अकाल मृत्यु (दुर्घटना, रोग, विष, जल में डूबना आदि) से दिवंगत आत्माओं की मुक्ति तथा पितृ दोष के कारण वंश वृद्धि में आ रही बाधा के निवारण हेतु नारायण बलि एकमात्र शास्त्रोक्त विधान है। इसमें भगवान श्रीविष्णु का स्वर्ण विग्रह बनाकर विधिवत तर्पण व पिंडदान किया जाता है।

मुख्य लाभ एवं प्रभाव:
  • संतान हीनता अथवा गर्भपात की समस्या का शास्त्रीय समाधान
  • अतृप्त पूर्वजों की प्रेत योनि से मुक्ति व सद्गति
  • परिवार में छाया भारी कलह व आर्थिक संकट का समूल निवारण
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त्रिपिंडी श्राद्ध

तीन पीढ़ियों के ज्ञात-अज्ञात, सात्विक, राजसिक व तामसिक पितरों की शांति

1 दिवस (अमावस्या अथवा तीर्थ क्षेत्र)

यदि किसी कुल में लगातार तीन वर्षों तक श्राद्ध न हुआ हो अथवा पूर्वजों की कोई अभिलाषा अधूरी रह गई हो, तो त्रिपिंडी श्राद्ध किया जाता है। इसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश के निमित्त जौ, तिल व चावल के तीन विशेष पिंड अर्पित कर पितरों को तृप्त किया जाता है।

मुख्य लाभ एवं प्रभाव:
  • माता, पिता व पूर्वजों के अज्ञात दोषों से मुक्ति
  • व्यापार व नौकरी में निरंतर आ रहे अवरोधों की समाप्ति
  • घर में मांगलिक कार्यों (विवाह आदि) में हो रहे विलंब का परिहार
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दशकर्म विधि एवं अंत्येष्टि संस्कार

गरुड़ पुराण अनुसार 10 दिनों का शास्त्रीय शुद्धि व पिंडदान विधान

10 से 13 दिवस

मानव जीवन के 16 संस्कारों में अंतिम व अत्यंत महत्वपूर्ण 'अंत्येष्टि एवं दशगात्र संस्कार' है। प्रथम दिन से लेकर दसवें दिन तक प्रतिदिन एक-एक पिंड दान कर सूक्ष्म देह का निर्माण किया जाता है। एकादशाह, द्वादशाह (सपिंडीकरण) व त्रयोदशाह (तेरहवीं) की संपूर्ण शास्त्रसम्मत विधि।

मुख्य लाभ एवं प्रभाव:
  • शुक्लयजुर्वेदीय एवं सामवेदीय प्रामाणिक विधि
  • दिवंगत आत्मा की यमलोक यात्रा को सुगम बनाना
  • पारिवारिक अशौच (सूतक) निवृत्ति एवं गृह शुद्धि
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महालय एवं पार्वण श्राद्ध (पितृ पक्ष)

आश्विन कृष्ण पक्ष (पितृ पक्ष) में संपूर्ण तर्पण व पिंडदान

तिथि अनुसार 1 दिवस

वर्ष भर में एक बार आने वाले पितृ पक्ष में पूर्वजों की तिथि पर वैदिक तर्पण, देव-ऋषि-मनुष्य-पितृ तर्पण, पंचबलि (गौ, श्वान, काक, देवादि, पिपीलिका) एवं ब्राह्मण भोजन की संपूर्ण व्यवस्था।

मुख्य लाभ एवं प्रभाव:
  • कुश, तिल, गंगाजल एवं अक्षत द्वारा शुद्ध तर्पण
  • पितृलोक से आए पूर्वजों की तृप्ति व आशीर्वाद
  • कुल में सुख-शांति, आयु, आरोग्य व ऐश्वर्य की वृद्धि
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वैदिक कर्मकांड प्रशिक्षण • आचार्यकुलम्

नारायण बलि, श्राद्ध व दशकर्म विधि सीखें

सनातन धर्म के वैदिक संस्कारों और कर्मकांड की विशुद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए इच्छुक विद्यार्थियों, आचार्यों व यजमानों को पंडित निपुण शर्मा जी द्वारा व्यक्तिगत रूप से कर्मकांड के गूढ़ सिद्धांतों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है।

कर्मकांड सीखने हेतु निःशुल्क पंजीकरण
१. संकल्प व पाद्य-अर्घ्य विधान

देश, काल, पात्र, गोत्र उच्चारण, प्राणायाम, शिखा बंधन व आचमन की शास्त्रीय विधि।

२. पिंडदान एवं वेदी संस्कार

जौ, तिल, घृत व मधु मिश्रित पिंड निर्माण, वेदी स्थापन एवं गरुड़ पुराणोक्त मंत्रोच्चार।

३. सपिंडीकरण व शुद्धि कर्म

प्रेत पिंड का पितृ पिंड में मिलन, पंचगव्य प्राशन, दीप दान व ब्राह्मण भोजन नियम।

नारायण बलि अथवा श्राद्ध कर्म हेतु तिथि व स्थान परामर्श

पंडित निपुण शर्मा • हरिद्वार, गया जी व गृह स्थल सेवा